आचार्य श्री समय सागर जी महाराज
आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक के बेलगांव में 27 अक्टूबर 1958, शरद पूर्णिमा को हुआ था। वर्तमान पट्टाचार्य आचार्यश्री समयसागर जी महाराज आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम दीक्षित शिष्य हैं।
बचपन से ही आचार्य श्री समय सागर जी की रुचि धर्म में ही रही। जन्म उपरांत माता पिता ने इनका नाम शांतिनाथ रखा तथा दीक्षा उपरांत इनका नाम समयसागर दीक्षागुरु आचार्यश्री ने दिया। छह भाई-बहनों में समय सागर जी महाराज सबसे छोटे है।
तथा संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के छोटे भाई हैं।
उनका जन्म कन्नड़ भाषा-भाषी परिवार में हुआ और बचपन से ही धर्म-आध्यात्म के प्रति गहरी रुचि थी। मात्र ९ वर्ष की आयु में जैन मुनि श्री शांतिसागरजी के प्रवचनों से वैराग्य का बीजारोपण हुआ, और आइ-सी उम्र में उन्होंने अध्यात्म में रुचि बढ़ाई। लगभग २० वर्ष की उम्र में उन्होंने गृह-परिवार त्याग कर शाश्वत सत्य की खोज के लिए तपस्या का मार्ग चुना।
३० जून १९६८ को अजमेर (राजस्थान) में उन्होंने सर्वपराधीनता त्याग कर दिगम्बर जैन मुनि के रूप में दीक्षा ग्रहण की। तपस्या और आत्मअन्वेषण के मार्ग पर रहते हुए उन्होंने जीवन को आत्म-निवेदित कर दिया और कठोर साधना तथा अहिंसा के जीवन को अपना आदर्श बनाया।