साधर्मी वात्सल्य का अर्थ
जैन परंपरा में साधर्मी वात्सल्य का अर्थ है — धर्ममार्ग पर चलने वाले साधर्मियों के प्रति प्रेम, सहयोग और सम्मान की भावना रखना। यह केवल साथ बैठकर भोजन करना नहीं, बल्कि परस्पर आत्मीयता, करुणा और समता का व्यवहार है। जब श्रावक-श्राविका मिलकर विनम्रता से एक-दूसरे का सत्कार करते हैं, तो समाज में एकता और सौहार्द की भावना दृढ़ होती है।
