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कुपोषण उन्मूलन में जैन समाज की भूमिका

कुपोषण केवल शारीरिक कमजोरी या भोजन की कमी का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक असमानता, जागरूकता की कमी और संसाधनों के असंतुलित वितरण का संकेत भी है। जब किसी बालक को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो उसका शारीरिक विकास ही नहीं, बल्कि मानसिक और बौद्धिक वृद्धि भी प्रभावित होती है। गर्भवती महिलाओं में कुपोषण आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य