जीव दया केवल एक नैतिक गुण
जैन दर्शन में जीव दया केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि धर्म का मूल आधार मानी गई है। प्रत्येक जीव—चाहे वह मनुष्य हो, पशु-पक्षी, कीट या सूक्ष्म प्राणी—आत्मा से युक्त है और सुख-दुःख का अनुभव करता है। इसलिए किसी भी जीव को पीड़ा पहुँचाना आत्मा की शुद्धि के मार्ग में बाधा माना गया है। अहिंसा का सिद्धांत इसी जीव दया
