ज्ञान और श्रद्धा का संतुलन
केवल ज्ञान या केवल श्रद्धा—दोनों अधूरे हैं। जैन परंपरा में ज्ञान को श्रद्धा और आचरण से जोड़कर देखा गया है। जब ज्ञान जीवन में उतरता है, तभी वह आत्मकल्याण का साधन बनता है।
केवल ज्ञान या केवल श्रद्धा—दोनों अधूरे हैं। जैन परंपरा में ज्ञान को श्रद्धा और आचरण से जोड़कर देखा गया है। जब ज्ञान जीवन में उतरता है, तभी वह आत्मकल्याण का साधन बनता है।
