
राष्ट्रहित में सहयोग एवं जनसेवा सहभागिता
जैन समाज राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है। आपदा, महामारी या सामाजिक संकट के समय सरकार को आर्थिक सहयोग, राहत सामग्री और सेवा कार्यों के माध्यम से समर्थन दिया जाता है।
अनेक जैन संस्थाएँ कर (tax) का ईमानदारी से भुगतान, राहत कोष में योगदान और जनहित कार्यक्रमों में भागीदारी को अपना कर्तव्य मानती हैं। धर्म और राष्ट्रहित परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माने जाते हैं।
0
