
प्रश्न: क्या मंदिर जाना आवश्यक है, या घर पर पूजा पर्याप्त है?
उत्तर: मंदिर आत्मचिंतन और शुद्ध वातावरण का केंद्र है। वहाँ जाने से श्रद्धा और एकाग्रता बढ़ती है। परंतु सच्ची पूजा अंतर्मन की भावना है। यदि मन शुद्ध है, तो घर पर भी पूजा फलदायी है। मंदिर साधन है, लक्ष्य आत्मशुद्धि है।
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