
शिक्षा को आत्मोन्नति का साधन
शिक्षा को आत्मोन्नति का साधन माना गया है। केवल लौकिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है। जैन सिद्धांतों में सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान) मोक्षमार्ग का एक आधार है।
इसलिए जैन समाज विद्यालयों, छात्रावासों, छात्रवृत्तियों और ग्रंथ प्रकाशन के माध्यम से शिक्षा के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि विवेक, संयम और नैतिकता से युक्त नागरिक बनाना है।
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