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आरती गुरु प्रमाण की

आरती भ्रम निवारती, संकटों को टालती आरती गुरु प्रमाण की श्री गुरु प्रमाण जी! मोक्ष पथ के सारथी! तव पदों में रमें नित्य मेरी मति आरती भ्रम निवारती० जो पिता सुरेंद्र की आँखों के तारे हैं माता श्री सोहिनी देवी के दुलारे हैं विद्यासागरार्य के चमकते सितारे हैं आरती भ्रम निवारती० सर्व शंकाओं के स्वयं समाधान हैं प्रणेता श्री गुणायतन,स्वयं

मुनिश्री विद्यासागर जी की आरती

विद्यासागर की, गुणआगर की, शुभ मंगल दीप सजाय के। आज उतारूँ आरतिया…..॥1॥ मल्लप्पा श्री, श्रीमती के गर्भ विषैं गुरु आये। ग्राम सदलगा जन्म लिया है, सबजन मंगल गाये॥ गुरु जी सब जन मंगल गाये, न रागी की, द्वेषी की, शुभ मंगल दीप सजाय के। आज उतारूँ आरतिया…..॥2॥ गुरुवर पाँच महाव्रत धारी, आतम ब्रह्म विहारी। खड्गधार शिवपथ पर चलकर, शिथिलाचार निवारी॥