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शाकाहार, सात्विक भोजन, नियमित साधना और मानसिक शांति

स्वास्थ्य को जैन दृष्टि में संयमित जीवनशैली से जोड़ा गया है। शाकाहार, सात्विक भोजन, नियमित साधना और मानसिक शांति — ये सभी स्वस्थ जीवन के अंग हैं। जैन समाज अनेक स्थानों पर अस्पताल, औषधालय और स्वास्थ्य शिविर संचालित करता है। अहिंसक आहार और नशामुक्त जीवनशैली को प्रोत्साहित करना भी स्वास्थ्य संरक्षण का महत्वपूर्ण भाग है। शरीर को साधना का साधन

शिक्षा को आत्मोन्नति का साधन

शिक्षा को आत्मोन्नति का साधन माना गया है। केवल लौकिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है। जैन सिद्धांतों में सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान) मोक्षमार्ग का एक आधार है। इसलिए जैन समाज विद्यालयों, छात्रावासों, छात्रवृत्तियों और ग्रंथ प्रकाशन के माध्यम से शिक्षा के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाता है। शिक्षा का उद्देश्य

जीव दया केवल एक नैतिक गुण

जैन दर्शन में जीव दया केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि धर्म का मूल आधार मानी गई है। प्रत्येक जीव—चाहे वह मनुष्य हो, पशु-पक्षी, कीट या सूक्ष्म प्राणी—आत्मा से युक्त है और सुख-दुःख का अनुभव करता है। इसलिए किसी भी जीव को पीड़ा पहुँचाना आत्मा की शुद्धि के मार्ग में बाधा माना गया है। अहिंसा का सिद्धांत इसी जीव दया

साधर्मी वात्सल्य का अर्थ

जैन परंपरा में साधर्मी वात्सल्य का अर्थ है — धर्ममार्ग पर चलने वाले साधर्मियों के प्रति प्रेम, सहयोग और सम्मान की भावना रखना। यह केवल साथ बैठकर भोजन करना नहीं, बल्कि परस्पर आत्मीयता, करुणा और समता का व्यवहार है। जब श्रावक-श्राविका मिलकर विनम्रता से एक-दूसरे का सत्कार करते हैं, तो समाज में एकता और सौहार्द की भावना दृढ़ होती है।

वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जीव दया

पूज्य मुनिश्री सुधासागर जी ने पर्यावरण संरक्षण को धर्म का अभिन्न अंग मानते हुए वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जीव दया के प्रति समाज को जागरूक किया। उन्होंने प्रवचनों के माध्यम से प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, संसाधनों के संयमित उपयोग और अहिंसामय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उनके मार्गदर्शन से अनेक स्थानों पर हरित अभियान और स्वच्छता प्रयास संचालित हुए, जो

तेरा हाथ हे सर पे गुरुवर 

तेरा हाथ हे सर पे गुरुवर अब मुझ को क्या डर हे गुरुवर… -२ दुनिया नज़रे फेरे तो फेरे ….. दुनिया नज़रें फेरे तो मुझ पर तेरी नज़र हे गुरुवर … तेरा दर्श यहाँ भी हे तेरा दर्श बाहाँ भी हे हर दुखः से लड़ने को गुरुवर तेरा एक जय करा काफ़ी हे ……. काफ़ी हे गुरुवर तेरी जय जय

तपस्या त्याग का अनोखा नजारा, नाव से अशोकनगर पहुंचे मुनि सुधा सागर महाराज

अशोकनगर: मुनिश्री सुधा सागर महाराज ने पहली बार नाव में सवार होकर सिंध नदी पार की. वे अशोकनगर जिले की सीमा में प्रवेश कर गए. यह दूसरा मौका है जब किसी बड़े जैन संत ने नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लिया. इससे पहले 2018 में आचार्य विद्यासागर महाराज ने 40 संतों के साथ बेतवा नदी पार की

मुनि सुधा सागर जी महाराज थूबोन जाएंगे:कलेक्टर-एसपी ने तैयारियों का जायजा लिया, 2 नवंबर को प्रस्थान करेंगे

मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज, जो वर्तमान में अशोकनगर में चतुर्मास कर रहे हैं। वह 2 नवंबर को तीर्थ क्षेत्र थूबोन के लिए प्रस्थान करेंगे। 4 नवंबर को थूबोन पहुंचेंगे। इस यात्रा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को कलेक्टर आदित्य सिंह, पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ राजेश जैन सहित कई